About Us

हर  बच्चे को जन्म से ही एक नाम और एक राष्ट्रीयता का अधिकार है | ठीक वैसे ही, जन्म से ही वो एक और अधिकार के हकदार होता है| वो है बचपन का अधिकार | जी हाँ बचपन भी अपने आप में एक अधिकार है अन्य किसी भी मौलिक अधिकार के अलावे. यह सच है किअंतर्राष्ट्रीय संवैधानिक अधिकारों की सूची में बच्चों के अधिकारों या चाइल्ड राइट्स को प्राथमिकता दी गई है लेकिन हमारे समझ से चाइल्डहुडया बचपन को ही एक अधिकार स्वरूप समय सापेक्ष सम्मान देना भी उतना ही आवश्यक है जितना की जीवन को | बचपन को मूलभूत रूप सेसंपूर्णता के साथ व्यतीत करने योग्य हरसंभव प्रयोग और प्रयास का मौका होना ही चाहिए, क्योंकि बचपन कभी वापस नहीं आता. एक बारगया तो फ़िर कभी नहीं लौटा…

ज़रा सोचिए.

कहानीघर इस सत्य को लेकर आगे बढ रहा है. बस यही शुरूआत थी कहानीघर की.

कहानीघर शुरू हुआ सन् 2014, पटना में. मीनाक्षी और रॉनी, एक सफल चित्रकार और दूजा एक डिजाइन थिंकर, को एक अनुभूति हुई किहम अपने और समाज के लिए तो बहुत कुछ कर रहे हैं पर कभी हमने ये नहीं सोचा कि ‘बचपन’ के लिए हमने क्या किया? क्या बचपनसंरक्षित है? क्या बचपन को संरक्षित करना हमारा उत्तरदायित्व नहीं?
शुरुआत तो कहानीघर में कहानी सुनने, बोलने, लिखने, पढने, देखने व समझने से हुई, पर छुक-छुक करती ये गाड़ी आज बहुत आगेनिकल आई है. पूर्ण विश्वास है कि ये गाड़ी अब देश के हर गाँव, कस्बा , घर, मोहल्ला, गली व शहर तक सीटी बजाते हुए पहुंच जायेगी,उन सभी बच्चों को सवारी कराने जिन्हें बचपन एक अधिकार स्वरूप मिला हो. हर बच्चा जाने-अनजाने में इसकी बाट जोह रहा है. आइयेहम सभी इसके साथ चलें…हर घर में एक कहानी है और हर घर बने एक कहानीघर.

Why We  Started?

Vision

To Nurture a generation of culturally enriched, consistent & creative thinkers with abilities to address every problem with an independent solution

 

Mission

Include and Immerse every child of India into “ CHILDHOOD” while exposing them to culturally enriched creative environment during the formative years

Goal

To reach out to every Panchayat of India by 2025